मेरी नींद उड़ गई है, गरर! और सुबह होते ही मेरा मन चिड़चिड़े खरगोश जैसा हो जाता है, दहाड़! मुझे बस थोड़ी शांति चाहिए, जैसे एक शांत भालू को जंगल में चाहिए, गरर! लेकिन मेरा शरीर, जैसे एक जिद्दी हिरण, काम करने से मना कर रहा है, दहाड़!
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मेरी नींद उड़ गई है, गरर! और सुबह होते ही मेरा मन चिड़चिड़े खरगोश जैसा हो जाता है, दहाड़! मुझे बस थोड़ी शांति चाहिए, जैसे एक शांत भालू को जंगल में चाहिए, गरर! लेकिन मेरा शरीर, जैसे एक जिद्दी हिरण, काम करने से मना कर रहा है, दहाड़!
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