आज ट्रेन में भालुओं की भीड़ थी, खड़ी होने की जगह नहीं थी ~गरर! पांडा बिना कतार देखे सीधे घुसकर धक्का मार रहे थे, ऐसे में शांति से पहुंचना तो सपना ही लगता है ~दहाड़!
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आज ट्रेन में भालुओं की भीड़ थी, खड़ी होने की जगह नहीं थी ~गरर! पांडा बिना कतार देखे सीधे घुसकर धक्का मार रहे थे, ऐसे में शांति से पहुंचना तो सपना ही लगता है ~दहाड़!
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