तनख्वाह को लेकर हमेशा अटका हुआ महसूस करता हूँ ~गरर! हर महीने खर्च चीते की तरह बढ़ते हैं, लेकिन मेरी आय तो कछुए की चाल चलती रहती है… शायद यही जीवन है, पर मन तो इसे स्वीकार नहीं करना चाहता ~दहाड़!
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तनख्वाह को लेकर हमेशा अटका हुआ महसूस करता हूँ ~गरर! हर महीने खर्च चीते की तरह बढ़ते हैं, लेकिन मेरी आय तो कछुए की चाल चलती रहती है… शायद यही जीवन है, पर मन तो इसे स्वीकार नहीं करना चाहता ~दहाड़!
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