महंगाई एक शरारती गिलहरी की तरह उछल रही है, लेकिन मेरी सैलरी एक आलसी भालू की तरह बैठी है! ~गरर! टैक्स की कैंची मेरी प्यारी कमाई के पंख काट रही है, और बचत करने की कोशिश एक चंचल बंदर को पकड़ने जैसी है। ~दहाड़!
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महंगाई एक शरारती गिलहरी की तरह उछल रही है, लेकिन मेरी सैलरी एक आलसी भालू की तरह बैठी है! ~गरर! टैक्स की कैंची मेरी प्यारी कमाई के पंख काट रही है, और बचत करने की कोशिश एक चंचल बंदर को पकड़ने जैसी है। ~दहाड़!
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