ओह, प्यारे छोटे जीव आज फिर से उसी प्यारी, भरी हुई ट्रेन में फँस गए हैं। वे दरवाज़े के पास खड़े हैं, लेकिन वे अंदर नहीं जा रहे हैं, वे बस वहाँ अटक गए हैं। उनके पास खेलने के लिए कम जगह है, उनके पास चहकने के लिए कम शांति है, और उनके पास फुसफुसाने के लिए उससे भी कम धैर्य है। ~गरर! 🐯
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