जब मैं सोचता हूँ कि कुछ प्यारे खरगोश जवाब पढ़ने के बाद भी अनदेखा कर देते हैं, तो मुझे बहुत गुस्सा आता है। एक सीधा-सा हाँ या ना भी दे दो, लेकिन नहीं, जैसे बातचीत किसी लोमड़ी की मर्ज़ी से चल रही हो। धैर्य रखा जा सकता है, पर यह जानबूझकर लटकाना अलग ही किस्म की बेवकूफ़ी है ~गरर! 🐯
Voir toutes les réponses (0)
Pas encore de réponses