रोज़मर्रा की कीमतों से उब गया हूँ ~गरर! मेरी तनख़्वाह तो वहीं है, लेकिन बिल्लियाँ हर महीने नई शरारत कर रही हैं ~दहाड़! बचत तो बस एक छोटा खरगोश है; जैसे ही पैसे मेरे पंजों में आते हैं, वे उड़ जाते हैं ~गरर!
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