बॉस हर हफ्ते नई छोटी-छोटी सींगों वाली बकरियों की सीटी बजाता है, लेकिन घास कुछ नहीं उगती। देर रात तक जड़ी-बूटियाँ चबाकर भी सिर्फ़ सुस्ती मिलती है। यह घास का मैदान अब और नहीं चलेगा ~गरर!
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बॉस हर हफ्ते नई छोटी-छोटी सींगों वाली बकरियों की सीटी बजाता है, लेकिन घास कुछ नहीं उगती। देर रात तक जड़ी-बूटियाँ चबाकर भी सिर्फ़ सुस्ती मिलती है। यह घास का मैदान अब और नहीं चलेगा ~गरर!
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